ब्यूरो रिपोर्ट नई दिल्ली|DTM
जयपुर भेजी गई 11.50 करोड़ रुपये की खेप में मिली कमी के बाद शुरू हुआ ऑडिट; तीन बैंक अधिकारी निलंबित, चार लोगों के खिलाफ FIR
सहारनपुर/मेरठ, 1 सितंबर 2026। पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के सहारनपुर स्थित करेंसी चेस्ट में महज 4.30 लाख रुपये की नकदी कमी की जांच अब करोड़ों रुपये के कथित जाली नोटों के बड़े मामले में बदल गई है। जयपुर भेजी गई 11.50 करोड़ रुपये की नकदी की गिनती में कमी सामने आने के बाद शुरू हुए विस्तृत ऑडिट में अब तक करीब 17 करोड़ रुपये मूल्य की जाली करेंसी मिलने की बात सामने आई है। हालांकि, बैंक की जांच और नोटों की गिनती अभी जारी है, इसलिए अंतिम आंकड़ा बाद में स्पष्ट होगा।
मामला सहारनपुर के घंटाघर के पास स्थित सोफिया मार्केट के पंजाब नेशनल बैंक करेंसी चेस्ट से जुड़ा है। बैंक की ओर से मामले में तीन अधिकारियों को निलंबित किया गया है, जबकि पुलिस ने अलग-अलग मामलों में FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
11.50 करोड़ की खेप से खुला पूरा मामला
जानकारी के मुताबिक, 5 अगस्त 2026 को सहारनपुर करेंसी चेस्ट से करीब 11.50 करोड़ रुपये की नकदी भारतीय रिजर्व बैंक की जयपुर करेंसी चेस्ट भेजी गई थी। इस रकम में पुराने, कटे-फटे और सड़े-गले नोट भी शामिल थे।
जयपुर में नकदी की गिनती के दौरान करीब 4,30,900 रुपये की कमी सामने आई। इसकी सूचना मेरठ स्थित बैंक कार्यालय को दी गई। इसके बाद मुख्य प्रबंधक एवं नोडल अधिकारी अरुण कुमार चौबे के नेतृत्व में टीम सहारनपुर पहुंची और करेंसी चेस्ट की विस्तृत जांच शुरू की गई।
CCTV में दिखा हाउसकीपर, चोरी का अलग मुकदमा
जांच के दौरान करेंसी चेस्ट के CCTV फुटेज में पार्ट-टाइम हाउसकीपर विशाल कुमार कथित तौर पर नकदी की गड्डियों से नोट निकालते हुए दिखाई दिए। बैंक ने उसकी सेवा समाप्त कर दी और नकदी कमी के मामले में सदर बाजार थाने में उसके खिलाफ अलग मुकदमा दर्ज कराया।
इसके बाद 9 अगस्त से करेंसी चेस्ट का व्यापक ऑडिट शुरू किया गया। ऑडिट टीम ने चेस्ट में मौजूद नकदी को बैंक के रिकॉर्ड से मिलाना शुरू किया।
7.40 करोड़ से बढ़कर करीब 17 करोड़ तक पहुंचा आंकड़ा
ऑडिट के शुरुआती चरण में करीब 7.40 करोड़ रुपये मूल्य के जाली नोट मिलने की बात सामने आई। जैसे-जैसे नोटों की जांच आगे बढ़ी, जाली करेंसी का आंकड़ा बढ़ता गया।
31 अगस्त की देर रात तक करीब 17 करोड़ रुपये मूल्य की कथित जाली करेंसी मिलने की जानकारी सामने आई है। बैंक अधिकारियों के मुताबिक, नोटों की गिनती और जांच अभी जारी है। ऐसे में अंतिम आंकड़ा इससे अधिक भी हो सकता है।
तीन बैंक अधिकारी निलंबित
जाली नोटों के मामले में PNB मेरठ के मुख्य प्रबंधक अरुण कुमार चौबे की शिकायत पर सदर बाजार थाने में FIR दर्ज की गई है। मामले में निम्न लोगों के नाम सामने आए हैं—
- रवि कुमार कांसे, वरिष्ठ मंडल प्रबंधक
- सुशील कुमार, करेंसी चेस्ट प्रबंधक
- अमित कुमार, पूर्व करेंसी चेस्ट प्रबंधक, जिनका करीब एक महीने पहले हरियाणा के जगाधरी के खेड़ा बाजार में तबादला हुआ था
- विशाल कुमार, हाउसकीपर, जिसके खिलाफ नकदी कमी के मामले में अलग मुकदमा दर्ज किया गया है।
बैंक ने तीन अधिकारियों को निलंबित कर दिया है और उनके खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू की गई है। मंडल कार्यालय की वरिष्ठ प्रबंधक निशा सिंह ने निलंबन की पुष्टि की है।
जाली नोट करेंसी चेस्ट तक कैसे पहुंचे?
मामले की जांच में सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतनी बड़ी मात्रा में कथित जाली करेंसी बैंक के करेंसी चेस्ट तक कैसे पहुंची।
करेंसी चेस्ट में नकदी जिले की विभिन्न बैंक शाखाओं से आती है। ग्राहक द्वारा जमा किए गए नोटों की शाखा स्तर पर जांच के बाद नकदी को करेंसी चेस्ट भेजा जाता है। जांच एजेंसियां मुख्य रूप से कई संभावनाओं पर काम कर रही हैं।
पहली संभावना: किसी शाखा में जाली नोट मशीन या कर्मचारियों की जांच से बच गए हों।
दूसरी संभावना: करेंसी चेस्ट में असली नोटों को निकालकर उनकी जगह जाली नोट रखे गए हों।
तीसरी संभावना: पुराने और खराब नोटों की खेप में पर्याप्त स्तर की जांच नहीं हुई हो और जाली नोट उनमें शामिल होकर आगे भेजे गए हों।
पुलिस और बैंक अधिकारी इस बात की भी जांच कर रहे हैं कि इतनी बड़ी मात्रा में जाली नोट किसी बड़े नेटवर्क या अंदरूनी मिलीभगत के जरिए तो नहीं पहुंचाए गए।
CCTV, कैश रिकॉर्ड और शाखाओं की जांच
जांच टीम करेंसी चेस्ट के CCTV फुटेज, कैश बही, बैंक रिकॉर्ड और विभिन्न शाखाओं से आने वाली नकदी का मिलान कर रही है। उन तारीखों की भी पड़ताल की जा रही है, जब बड़ी मात्रा में नकदी करेंसी चेस्ट में जमा हुई थी।
अधिकारियों से यह भी पूछा जा रहा है कि करेंसी चेस्ट में मौजूद नकदी की नियमित जांच और निगरानी के बावजूद इतनी बड़ी मात्रा में कथित जाली नोट लंबे समय तक कैसे नहीं पकड़े गए।
पुलिस ने गठित की SIT
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने विशेष जांच टीम (SIT) गठित की है। डीआईजी अभिषेक सिंह, जिलाधिकारी अरविंद चौहान और एसएसपी अभिनंदन ने भी करेंसी चेस्ट का निरीक्षण किया।
एसपी सिटी व्योम बिंदल के अनुसार, जाली नोट और नकदी कमी से संबंधित दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए हैं। पुलिस जाली नोटों के स्रोत और पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है।
डीआईजी के मुताबिक, बैंक स्तर पर आंतरिक जांच चल रही है, जबकि पुलिस पूरे मामले में जाली करेंसी के स्रोत और संभावित गिरोह की जांच कर रही है।
फरवरी और अगस्त की नकदी खेप भी जांच के दायरे में
बैंक सूत्रों के अनुसार, फरवरी में भी करेंसी चेस्ट से बड़ी मात्रा में नकदी भेजी गई थी, जबकि अगस्त में दूसरी बड़ी खेप जयपुर भेजी गई। जांच टीम अब पिछली नकदी आवाजाही का रिकॉर्ड भी खंगाल रही है।
अधिकारी पिछले कई दिनों से करेंसी चेस्ट में मौजूद नोटों की एक-एक करके जांच कर रहे हैं। आशंका है कि विस्तृत जांच पूरी होने तक जाली करेंसी का आंकड़ा और बढ़ सकता है।
अब इन सवालों के जवाब तलाश रही जांच एजेंसियां
जांच का मुख्य फोकस तीन बिंदुओं पर है—
- जाली नोट कहां और किस नेटवर्क के जरिए तैयार किए गए?
- ये नोट किस शाखा या व्यक्ति के माध्यम से करेंसी चेस्ट तक पहुंचे?
- बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों की निगरानी में लापरवाही हुई या किसी स्तर पर मिलीभगत थी?
फिलहाल पुलिस CCTV फुटेज, बैंक रिकॉर्ड और नकदी जमा कराने से जुड़े दस्तावेजों के आधार पर संदिग्धों की भूमिका की जांच कर रही है।
छोटी नकदी कमी से खुला बड़ा राज
सहारनपुर PNB करेंसी चेस्ट में सामने आया यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि एक मामूली-सी दिखने वाली 4.30 लाख रुपये की कमी की जांच के दौरान करोड़ों रुपये की कथित जाली करेंसी का खुलासा हुआ। हालांकि करीब 17 करोड़ रुपये का आंकड़ा फिलहाल जांचाधीन है और अंतिम पुष्टि विस्तृत ऑडिट एवं फॉरेंसिक जांच के बाद ही होगी।
मामले ने बैंकिंग व्यवस्था में करेंसी चेस्ट की निगरानी, नकदी सत्यापन और जाली नोटों की पहचान को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नोट: इस रिपोर्ट में उल्लिखित जाली करेंसी की राशि जारी ऑडिट के आधार पर बताई गई है। FIR में नामजद व्यक्तियों के खिलाफ लगाए गए आरोप जांच के अधीन हैं। किसी भी आरोपी को दोषी साबित होने तक निर्दोष माना जाएगा।
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