सहारनपुर के बाद मुरादाबाद: मुस्तफा मस्जिद को नोटिस, एमडीए ने मांगा नक्शा

उत्तर प्रदेश

ब्यूरो रिपोर्ट नई दिल्ली|DTM

8 सितंबर 2026 नई दिल्ली|मुरादाबाद: सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद के ध्वस्तीकरण के कुछ ही दिन बाद मुरादाबाद में एक और मस्जिद को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई की चर्चा तेज हो गई है। मुरादाबाद विकास प्राधिकरण (एमडीए) ने दिल्ली रोड स्थित पाकबड़ा क्षेत्र की मुस्तफा मस्जिद के प्रबंधकों को नोटिस जारी कर निर्माण संबंधी दस्तावेज और स्वीकृत नक्शा पेश करने को कहा है। नोटिस के अनुसार निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब न मिलने पर अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई हो सकती है।
एमडीए का नोटिस 21 अगस्त 2026 को उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा 27 के तहत जारी किया गया था। प्राधिकरण का कहना है कि जोन-1, एसजेड-1, मोहल्ला ईदगाह, दिल्ली रोड पर तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय (टीएमयू) के पास लगभग 300 वर्ग मीटर क्षेत्र में यह निर्माण किया गया है। मौके पर स्वीकृति संबंधी दस्तावेज नहीं दिखाए जाने का उल्लेख नोटिस में है। प्रबंधकों से 3 सितंबर 2026 दोपहर एक बजे तक यह बताने को कहा गया था कि इस निर्माण को गिराने का आदेश क्यों न दिया जाए। कुछ रिपोर्टों में 15 दिन के भीतर स्वयं निर्माण हटाने का निर्देश भी बताया गया है।
स्थानीय रिपोर्टों में मस्जिद को करीब 40 वर्ष पुरानी बताया गया है और कहा गया है कि यह विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार की दीवार से सटी हुई है। वहीं एमडीए के नोटिस में कथित निर्माण शुरू होने की तारीख 20 अगस्त 2026 दर्ज किए जाने का उल्लेख कुछ समाचारों में आया है। यह अंतर कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बन सकता है। मस्जिद प्रबंधन की ओर से अभी सार्वजनिक रूप से विस्तृत जवाब सामने नहीं आया है। कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि यहां केवल नमाज पढ़ाने का कार्य होता है।
यह मामला सहारनपुर की उस घटना के तुरंत बाद सामने आया है, जिसमें 5 सितंबर 2026 को कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद को जिला अदालत के आदेश के बाद ध्वस्त कर दिया गया था। उस मामले में सिटी मजिस्ट्रेट ने जुलाई में ढांचे को सरकारी भूमि पर अनधिकृत करार दिया था और बाद में जिला न्यायाधीश की अदालत ने अपील खारिज कर दी थी। मुरादाबाद का वर्तमान मामला अभी नोटिस और जवाब के चरण में है। ध्वस्तीकरण की कोई तात्कालिक कार्रवाई रिपोर्ट नहीं हुई है।

एमडीए पिछले वर्षों में भी जिले में अवैध निर्माण, तालाब भूमि पर अतिक्रमण और प्राधिकरण की भूमि पर बने ढांचों के खिलाफ कार्रवाई करता रहा है। मुस्तफा मस्जिद के मामले में आगे की दिशा प्रबंधन द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों, प्राधिकरण की जांच और यदि आवश्यकता हुई तो न्यायालय की प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।
(यह आलेख उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्टों पर आधारित है। अंतिम निर्णय सक्षम प्राधिकारी और अदालत का होगा।)

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