ब्यूरो रिपोर्ट नई दिल्ली|DTM
8 सितंबर 2026 नई दिल्ली|उज्जैन: सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के अंतर्गत कंठाल चौराहा से छत्री चौक तक चल रहे सड़क चौड़ीकरण कार्य के दौरान प्राचीन खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा को सुरक्षित स्थानांतरित करने का प्रयास पिछले कई दिनों से जारी है। मंदिर का बाहरी ढांचा हटाया जा चुका है, किंतु मुख्य प्रतिमा अभी भी अपने मूल स्थान पर विराजमान है। प्रशासन ने प्रतिमा को कैनोपी टेंट से ढककर सुरक्षित रखा है तथा परिसर के चारों ओर बैरिकेडिंग कर दी गई है।
नगर निगम और जिला प्रशासन का कहना है कि शाही सवारी मार्ग को सुगम बनाने के लिए यह चौड़ीकरण आवश्यक है। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया है कि प्रतिमा को बिना किसी क्षति के और धार्मिक मर्यादा का पूर्ण ध्यान रखते हुए ही स्थानांतरित किया जाएगा। प्रतिमा के आधार की स्थिति समझने के लिए सीमित तकनीकी परीक्षण किया गया है। भारी मशीनों का आगे उपयोग फिलहाल रोक दिया गया है, ताकि प्राचीन प्रतिमा को किसी भी प्रकार का नुकसान न पहुंचे।
स्थानीय परंपरा के अनुसार यह मंदिर लगभग 170 वर्ष पुराना माना जाता है। वहीं विक्रम विश्वविद्यालय के पुरातत्व विशेषज्ञ प्रो. रमण सोलंकी के अनुसार प्रतिमा मालवा क्षेत्र के बेसाल्ट पत्थर से तराशी गई प्रतीत होती है और इसकी शिल्प शैली परमार काल की परंपरा से जुड़ी हो सकती है। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि आगे की कार्रवाई से पहले प्रतिमा के आधार, आंतरिक संरचना और आसपास की मिट्टी की वैज्ञानिक स्कैनिंग कराई जाए। प्रशासन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण तथा राज्य पुरातत्व विभाग की सहायता लेने पर विचार कर रहा है।
क्या हुआ था
सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत कंठाल चौराहा से छत्री चौक तक सड़क चौड़ीकरण चल रहा है। इसी रास्ते पर “खड़े हनुमान” मंदिर आ गया। मंदिर का ढांचा तोड़ दिया गया, लेकिन मुख्य प्रतिमा अपनी जगह पर ही रह गई। कई दिनों तक क्रेन, जेसीबी आदि से हटाने की कोशिश की गई, लेकिन प्रतिमा नहीं हिली। बाद में भारी मशीनों का इस्तेमाल रोक दिया गया क्योंकि प्रतिमा को नुकसान पहुंचने का खतरा था। रविवार को 50 से अधिक बंदर भी मौके पर पहुंच गए, जिसका वीडियो वायरल हुआ।
इन दिनों स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। भक्त आरती-पूजन कर रहे हैं और प्रतिमा के सुरक्षित रहने की प्रार्थना कर रहे हैं। कई श्रद्धालु इसे अपनी आस्था का विषय मानते हुए मूल स्थान पर ही प्रतिमा रखने की विनती कर रहे हैं। प्रशासन का रुख यह है कि विकास कार्य और आस्था दोनों का समन्वय रखा जाएगा तथा कोई भी निर्णय विशेषज्ञों की रिपोर्ट और संबंधित पक्षों से विचार-विमर्श के बाद ही लिया जाएगा।
फिलहाल प्रतिमा अपने स्थान पर सुरक्षित है। आगे की प्रक्रिया तकनीकी परीक्षण के निष्कर्ष पर निर्भर करेगी। उज्जैन जैसे तीर्थ नगर में विकास और श्रद्धा के बीच संतुलन बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिकता बताया जा रहा है।
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