भोपाल पहुंचे दो हजार किसान, मूंग की शत-प्रतिशत खरीद की मांग को लेकर धरना जारी

मध्यप्रदेश राजनीति

ब्यूरो रिपोर्ट | Dilli Times Media

भोपाल, 29 जुलाई 2026: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मंगलवार से किसानों का बड़ा आंदोलन तेज हो गया है। संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के बैनर तले करीब 19 किसान संगठनों के लगभग दो हजार किसान नर्मदापुरम, हरदा और आसपास के जिलों से ‘किसान क्रांति पदयात्रा’ के जरिए भोपाल पहुंचे। वे मूंग की फसल की शत-प्रतिशत सरकारी खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कराने की मांग कर रहे हैं।
किसान नेताओं के अनुसार, राज्य में इस सीजन में उत्पादित मूंग का मात्र 25 प्रतिशत ही एमएसपी पर खरीदा गया है। शेष फसल को किसानों को खुले बाजार में काफी कम दाम पर बेचना पड़ रहा है। आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगें हैं—मूंग की पूरी फसल का सरकारी खरीद एमएसपी ₹8,768 प्रति क्विंटल पर सुनिश्चित किया जाए, ई-टोकन प्रणाली की खामियों को दूर किया जाए या पुरानी व्यवस्था बहाल की जाए तथा खाद की समय पर और उचित मूल्य पर उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
पदयात्रा के दौरान कई स्थानों पर पुलिस ने बैरिकेडिंग कर किसानों को रोकने की कोशिश की। किसानों ने बैरिकेड तोड़कर भोपाल के बाहरी इलाकों में पहुंचकर धरना शुरू कर दिया। वे अपने साथ अनाज के बोरे, बिस्तर और खाना-पीना लेकर आए हैं, जिससे साफ है कि वे लंबे समय तक आंदोलन जारी रखने के लिए तैयार हैं।
बुधवार दोपहर कृषि मंत्री अड़ाल सिंह कंसाना सहित राज्य सरकार के प्रतिनिधियों से किसानों के प्रतिनिधिमंडल की बातचीत हुई। हालांकि रातभर चली चर्चा निष्फल रही। सरकार ने मुद्दों पर विचार के लिए एक पैनल गठित करने का संकेत दिया है, लेकिन किसान संगठन अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि जब तक शत-प्रतिशत खरीद और अन्य मुद्दों का समाधान नहीं होता, वे भोपाल में डटे रहेंगे।
यह आंदोलन मध्य प्रदेश सरकार के लिए हाल के वर्षों में सबसे बड़े किसान विरोधों में से एक माना जा रहा है। मूंग उत्पादक जिलों से आए किसान कह रहे हैं कि उत्पादन बढ़ने के बावजूद खरीद व्यवस्था कमजोर पड़ने से उन्हें भारी नुकसान हो रहा है। पुलिस प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया है, जबकि कई इलाकों में यातायात प्रभावित होने की खबरें हैं।
किसान संगठनों ने आंदोलन को शांतिपूर्ण रखने का आश्वासन दिया है, लेकिन मांगों पर सरकार से ठोस आश्वासन मिलने तक धरना जारी रखने का संकल्प दोहराया है। स्थिति पर नजर रखने के लिए प्रशासन और किसान दोनों पक्ष सतर्क हैं।

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