संजीव कुमार भाटी ग्रेटर नोएडा|Dilli Times Media
ग्रेटर नोएडा, 17 अगस्त 2026: ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण कार्यालय पर सोमवार को हुए किसान आंदोलन के दौरान महिला किसानों के साथ पुलिसकर्मियों द्वारा कथित बदसलूकी के गंभीर आरोप लगे हैं। किसानों का आरोप है कि अपनी लंबित मांगों को लेकर प्राधिकरण पहुंचे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया, जिसमें महिला किसानों के साथ भी बदतमीजी की गई। इस कार्रवाई पर किसानों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के संवैधानिक अधिकार का हवाला देते हुए सवाल उठाए हैं।
किसान संघर्ष मोर्चा और किसान सभा के नेतृत्व में सैकड़ों किसान प्राधिकरण परिसर की ओर कूच कर गिरफ्तारी देने पहुंचे थे। मौके पर पहले से भारी पुलिस बल तैनात था। प्राधिकरण के बाहर बैरिकेडिंग की गई थी, जबकि पारंपरिक धरना स्थल पर मिट्टी के बड़े-बड़े ढेर डाल दिए गए और जेसीबी व डंपर ट्रक खड़े कर दिए गए। किसानों का कहना है कि यह व्यवस्था उनके शांतिपूर्ण प्रदर्शन को रोकने का प्रयास है।
मांगें
प्रदर्शन कर रहे किसान मुख्य रूप से अधिग्रहित कृषि भूमि के बदले 10 प्रतिशत विकसित आबादी भूखंड की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि प्राधिकरण ने केवल छह प्रतिशत भूखंड दिए हैं, जबकि नियमों और वादों के अनुसार 10 प्रतिशत मिलना चाहिए था। इसके अलावा 854 आबादी प्रकरणों का शीघ्र निस्तारण, नए भूमि अधिग्रहण कानून के अनुसार सर्किल रेट का पुनरीक्षण और विकसित भूखंडों का आवंटन प्रमुख मांगों में शामिल हैं। करीब 44 गांवों के लगभग एक लाख प्रभावित किसान परिवार इन मुद्दों से जुड़े हैं।
किसान नेताओं ने बताया कि पहले कई बार वार्ता के आश्वासन दिए गए थे, लेकिन ठोस समाधान नहीं निकला। स्वतंत्रता दिवस पर ‘किसान जोड़ो, किसान बचाओ’ तिरंगा यात्रा भी निकाली गई थी, जिसमें 17 अगस्त के महापड़ाव में बड़ी भागीदारी की अपील की गई थी।
आरोप और नाराजगी
महिला किसानों ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया। किसानों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपने हक की मांग कर रहे हैं और पुलिस की कार्रवाई अनुचित है। इस घटना से किसानों में व्यापक नाराजगी देखने को मिली है। किसान संघर्ष मोर्चा ने पहले भी घरों पर पुलिस तैनाती का विरोध किया था और कहा था कि आंदोलन हर हाल में होगा।
पुलिस और प्राधिकरण की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हो सकी। प्रशासन का रुख सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने और कानून-व्यवस्था सुनिश्चित करने का रहा।
किसान संगठन आंदोलन जारी रखने का संकल्प दोहरा रहे हैं। उन्होंने कहा है कि मांगों का समाधान होने तक संघर्ष जारी रहेगा। मामले की आगे की जांच और दोनों पक्षों के बयान आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
(समाचार स्रोत: स्थानीय रिपोर्ट्स और किसान संगठनों के बयान पर आधारित)
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