ब्यूरो रिपोर्ट नई दिल्ली|Dilli Times Media
नई दिल्ली, 24 अगस्त 2026: सोमवार को दिल्ली-एनसीआर में हुई तेज बारिश ने पुरानी दिल्ली के सबसे बड़े थोक बाजार सदर बाजार को फिर एक बार तालाब में बदल दिया। बाजार की कई गलियों में कमर तक पानी भर गया और बारिश का पानी दर्जनों दुकानों के अंदर तक पहुंच गया। इससे सैकड़ों व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा।
सुबह से शुरू हुई भारी बारिश के कारण सदर बाजार की सड़कें पूरी तरह जलमग्न हो गईं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में साफ दिख रहा है कि लोग और मजदूर घुटनों-कमर तक पानी में चलते नजर आ रहे हैं। कई दुकानदारों ने शटर बंद कर दिए, जबकि कुछ दुकानों में सामान को ऊंचे स्थानों पर शिफ्ट करने की कोशिश की जा रही थी। पानी के कारण माल खराब होने का खतरा बढ़ गया है।
सदर बाजार देश के सबसे व्यस्त थोक बाजारों में से एक है, जहां रोजाना हजारों व्यापारी और मजदूर काम करते हैं। यहां हर मानसून में जलभराव की समस्या दोहराई जाती है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि नालों की सफाई और जल निकासी व्यवस्था ठीक नहीं होने के कारण थोड़ी तेज बारिश होते ही पानी जमा हो जाता है। कुछ व्यापारियों ने बताया कि पिछले कुछ हफ्तों में भी इसी तरह की स्थिति पैदा हो चुकी थी।
शहर के अन्य कई इलाकों में भी भारी जलभराव देखने को मिला। संगम विहार, जखीरा अंडरपास, आईटीओ, कनॉट प्लेस, मथुरा रोड और कमला नगर बाजार समेत कई जगहों पर सड़कें पानी में डूब गईं। मौसम विभाग के अनुसार जनकपुरी में 67 मिलीमीटर, छतरपुर में 57 मिलीमीटर और पितामपुरा में 35 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। बारिश के कारण दिल्ली हवाई अड्डे से कई उड़ानें डायवर्ट करनी पड़ीं और यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई।
विपक्षी दल आम आदमी पार्टी ने इस स्थिति पर दिल्ली सरकार पर निशाना साधा। पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने सदर बाजार के वीडियो साझा करते हुए कहा कि नालों की सफाई के बड़े-बड़े दावे खोखले साबित हो रहे हैं। उन्होंने कहा, “यह दृश्य दिल्ली के सबसे प्रसिद्ध व्यावसायिक केंद्र सदर बाजार का है। पानी दुकानों में घुस गया है, सामान बर्बाद हो रहा है और दुकानदार बेबस हैं।”
विशेषज्ञों का मानना है कि सदर बाजार जैसे पुराने और घनी आबादी वाले बाजार क्षेत्रों में जल निकासी व्यवस्था को आधुनिक बनाने तथा नालों की नियमित और प्रभावी सफाई पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। जब तक बुनियादी ढांचे में सुधार नहीं किया जाता, हर मानसून में व्यापारियों को इस तरह की परेशानी का सामना करना पड़ता रहेगा।
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