ब्यूरो रिपोर्ट नई दिल्ली|DTM
सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना के साथ होगा पूजन, कन्या पूजन की भी रहेगी परंपरा
नई दिल्ली 18 अक्टूबर 2026: शारदीय नवरात्रि की अष्टमी तिथि पर माँ दुर्गा के आठवें स्वरूप माँ महागौरी की पूजा-अर्चना की जाती है। इस अवसर पर श्रद्धालु विधि-विधान से पूजन कर सुख-समृद्धि, शांति और परिवार के कल्याण की कामना करते हैं। दुर्गा अष्टमी पर मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना के साथ घरों में भी धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माँ महागौरी पवित्रता, शांति और सौभाग्य की प्रतीक हैं। उनका स्वरूप अत्यंत शांत और तेजस्वी माना जाता है। श्वेत वस्त्र धारण करने तथा वृषभ पर विराजमान होने के कारण उन्हें महागौरी कहा जाता है। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक उनकी आराधना करने से भक्तों को सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
कन्या पूजन का विशेष महत्व
दुर्गा अष्टमी पर कन्या पूजन की विशेष परंपरा है। इस दिन कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनका पूजन किया जाता है और उन्हें भोजन कराकर दक्षिणा व उपहार भेंट किए जाते हैं। यह परंपरा नारी शक्ति के सम्मान और श्रद्धा का प्रतीक मानी जाती है। कई श्रद्धालु इस अवसर पर हवन, दुर्गा सप्तशती का पाठ और भजन-कीर्तन भी करते हैं।
पवित्रता और सदाचार का संदेश
माँ महागौरी की आराधना आस्था के साथ मन की पवित्रता, करुणा और सद्कर्मों का संदेश भी देती है। यह पर्व समाज में नारी सम्मान, सेवा और सकारात्मकता की भावना को मजबूत करने की प्रेरणा देता है। श्रद्धालु माँ से जीवन की बाधाएं दूर करने और परिवार में सुख-शांति बनाए रखने की प्रार्थना करते हैं।
दुर्गा अष्टमी नवरात्रि के प्रमुख पर्वों में शामिल है। इस दिन देवी की आराधना के साथ श्रद्धालु शक्ति, भक्ति और विश्वास के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हैं।
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