14 जुलाई 2026 नई दिल्ली| रात में सोते समय हाथ सुन्न हो जाना, मोबाइल पकड़ते हुए उंगलियों में झनझनाहट महसूस होना या सुबह उठते ही हाथ “सोया हुआ” लगना आजकल एक आम समस्या बन गई है। हालांकि अधिकांश लोग इसे सामान्य थकान या नस दबने की मामूली समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि बार-बार होने वाला सुन्नपन शरीर की नसों पर दबाव का संकेत हो सकता है, जिसका समय पर इलाज न होने पर स्थायी कमजोरी का खतरा बढ़ जाता है।
मैक्स स्मार्ट सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, साकेत के प्रिंसिपल डायरेक्टर एवं हैंड टू शोल्डर सर्जरी विशेषज्ञ डॉ. विकास गुप्ता के अनुसार, हाथों में सुन्नपन का सबसे सामान्य कारण कार्पल टनल सिंड्रोम है। इस स्थिति में कलाई की मीडियन नस दब जाती है, जिससे अंगूठे, तर्जनी और मध्यमा उंगली में विशेष रूप से रात के समय झनझनाहट और सुन्नपन महसूस होता है। लंबे समय तक कंप्यूटर या मोबाइल का उपयोग करने वाले, बार-बार हाथों से एक जैसे काम करने वाले, मधुमेह और थायरॉयड के मरीज तथा गर्भवती महिलाओं में इसका खतरा अधिक रहता है।
उन्होंने बताया कि क्यूबिटल टनल सिंड्रोम भी हाथ सुन्न होने का एक प्रमुख कारण है, जिसमें कोहनी के पास अल्नर नस दबने से छोटी उंगली और अनामिका प्रभावित होती हैं। इसके अलावा गर्दन की नस दबना, मधुमेह से होने वाली न्यूरोपैथी, विटामिन बी-12 की कमी और अत्यधिक शराब का सेवन भी इस समस्या की वजह बन सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार शुरुआती अवस्था में कुछ आसान उपायों से राहत मिल सकती है। रात में कलाई को सीधा रखने के लिए रिस्ट स्प्लिंट पहनना, हर 30–40 मिनट बाद मोबाइल या कंप्यूटर से ब्रेक लेना, हाथों और कलाई का हल्का व्यायाम करना, लंबे समय तक कोहनी मोड़कर फोन पर बात करने से बचना, सोते समय हाथ को सिर के नीचे न दबाना और मधुमेह के मरीजों द्वारा ब्लड शुगर को नियंत्रित रखना बेहद जरूरी है। साथ ही संतुलित आहार लेने और आवश्यकता होने पर विटामिन बी-12 की जांच कराने की भी सलाह दी गई है।
डॉ. गुप्ता ने चेतावनी दी कि यदि हाथों की पकड़ कमजोर होने लगे, चीजें हाथ से छूटने लगें, हथेली की मांसपेशियां पतली दिखाई देने लगें, सुन्नपन लगातार बना रहे, गर्दन से हाथ तक करंट जैसा दर्द महसूस हो या शरीर के एक तरफ अचानक सुन्नपन, बोलने में परेशानी और चक्कर जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। ऐसे लक्षण स्ट्रोक जैसी गंभीर स्थिति का संकेत भी हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि नसों पर दबाव जितना अधिक समय तक बना रहता है, उपचार उतना ही कठिन हो जाता है। नर्व कंडक्शन टेस्ट (NCV) के माध्यम से नसों की स्थिति का सही आकलन किया जा सकता है। शुरुआती मामलों में दवा, व्यायाम और रिस्ट स्प्लिंट से इलाज संभव है, जबकि गंभीर मामलों में आधुनिक एंडोस्कोपिक सर्जरी के जरिए छोटे चीरे से नस पर दबाव हटाया जाता है और अधिकांश मरीज उसी दिन घर लौट सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि हाथों में बार-बार होने वाले सुन्नपन और झनझनाहट को सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज न करें। समय पर जांच और उपचार से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।
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