नई दिल्ली: यूट्यूबर ध्रुव राठी से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाले कंटेंट को लेकर अहम टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार सभी को है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि किसी की धार्मिक या सामाजिक भावनाओं को आहत करने वाला कंटेंट प्रसारित किया जाए।
कोर्ट ने कहा कि सोशल मीडिया का प्रभाव आज बेहद व्यापक है, इसलिए कंटेंट क्रिएटर्स की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। किसी भी वीडियो या पोस्ट को प्रकाशित करने से पहले उसके समाज पर पड़ने वाले प्रभाव को ध्यान में रखना आवश्यक है।
यह टिप्पणी ध्रुव राठी के एक वीडियो को लेकर दायर याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आई। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि संबंधित वीडियो से कुछ लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं। मामले की सुनवाई फिलहाल जारी है और अदालत ने अभी अंतिम फैसला नहीं सुनाया है।
मुख्य बातें
- दिल्ली हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया कंटेंट को लेकर सख्त टिप्पणी की।
- कोर्ट ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी भी जरूरी है।
- किसी की भावनाएं आहत करने वाला कंटेंट स्वीकार्य नहीं हो सकता।
- मामला ध्रुव राठी के एक वीडियो से संबंधित याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया।
- मामले में अंतिम निर्णय अभी आना बाकी है।
नोट: यह मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है। अदालत की अंतिम सुनवाई और आदेश के बाद स्थिति में बदलाव संभव है।
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