चुनाव आयोग पर बृजभूषण का पलटवार, बोले- पहले नियुक्तियों की प्रक्रिया ही नहीं थी

उत्तर प्रदेश राजनीति

ब्यूरो रिपोर्ट नई दिल्ली|DTM

2023 के कानून का हवाला देकर विपक्ष पर साधा निशाना; नवीन चावला और एमएस गिल की नियुक्ति पर उठाए सवाल

5 अक्टूबर 2026 नई दिल्ली/लखनऊ: चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया और उसकी निष्पक्षता को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच भाजपा नेता और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि आज चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, लेकिन पहले लंबे समय तक चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए कोई स्पष्ट वैधानिक प्रक्रिया ही मौजूद नहीं थी।

बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि करीब 2023 के आसपास चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। अदालत ने उस समय नियुक्ति की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाया। उनके मुताबिक, इसके बाद संसद ने संवैधानिक व्यवस्था के तहत कानून बनाया और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए एक चयन समिति का प्रावधान किया गया।

उन्होंने कहा कि मौजूदा व्यवस्था के तहत चयन समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय कैबिनेट मंत्री शामिल होते हैं। इस कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दिए जाने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अदालत ने अब तक इस कानून को रद्द नहीं किया है।

बृजभूषण ने विपक्ष से सवाल किया कि पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त नवीन चावला और एमएस गिल की नियुक्तियां किस व्यवस्था के तहत हुई थीं। उनका कहना था कि यदि उस दौर की नियुक्तियों पर सवाल नहीं उठाए गए, तो आज चुनाव आयोग की प्रक्रिया को लेकर इतना विवाद क्यों खड़ा किया जा रहा है।

EVM पर भी विपक्ष को घेरा

भाजपा नेता ने EVM को लेकर उठाए जाने वाले सवालों पर भी विपक्ष को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि EVM आने से पहले भी देश में चुनाव होते थे और उस समय चुनावी प्रक्रिया पर इसी तरह सवाल नहीं उठाए जाते थे। उनका आरोप था कि वर्ष 2014 के बाद राजनीतिक परिस्थितियां बदलने और चुनावी हार के बाद EVM तथा चुनाव आयोग को लेकर सवाल अधिक सामने आने लगे।

बृजभूषण का यह बयान ऐसे समय आया है जब चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक और कानूनी बहस जारी है। विपक्ष जहां नियुक्ति समिति की संरचना में सरकार के प्रभाव को लेकर सवाल उठाता रहा है, वहीं सत्तापक्ष मौजूदा व्यवस्था को संसद द्वारा बनाए गए कानून और संवैधानिक प्रक्रिया का परिणाम बताता है।

राजनीतिक बहस के बीच अब निगाहें इस बात पर हैं कि चुनाव आयोग की नियुक्ति संबंधी कानून को चुनौती देने वाले मामलों में सुप्रीम कोर्ट का अंतिम रुख क्या रहता है।

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