ब्यूरो रिपोर्ट नई दिल्ली|Dilli Times Media
नई दिल्ली, 7 अगस्त 2026: केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने NEET-UG 2026 परीक्षा के पेपर लीक मामले में दायर अपनी चार्जशीट में चौंकाने वाला खुलासा किया है। एजेंसी के अनुसार, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा नियुक्त तीन सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स ने ही गोपनीय प्रश्न पत्र लीक किया था। यह लीक महज एक आकस्मिक घटना नहीं, बल्कि महीनों पहले से रची गई बहु-राज्यीय आपराधिक साजिश का हिस्सा था।
CBI ने दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में दायर 94 पेज की चार्जशीट में 13 आरोपियों के नाम शामिल किए हैं। इनमें तीन NTA सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स प्रमुख हैं — बॉटनी विशेषज्ञ मनीषा गुरुनाथ मंदहरे, केमिस्ट्री विशेषज्ञ प्रह्लाद विट्ठलराव कुलकर्णी (पी.वी. कुलकर्णी) और फिजिक्स विशेषज्ञ मनीषा संजय हवलदार।
कैसे हुआ लीक?
चार्जशीट के अनुसार, ये तीनों एक्सपर्ट्स पेपर सेटिंग, मॉडरेशन और अनुवाद-बैक ट्रांसलेशन की प्रक्रिया में शामिल थे। उन्हें अंतिम प्रश्न पत्र के पूर्ण सेट तक पहुंच हासिल थी। CBI का आरोप है कि उन्होंने NTA कार्यालय में काम के दौरान सवालों को छोटी चिट्स पर नोट किया या याद कर लिया।
कुछ सवालों को NCERT की किताबों में संबंधित पैराग्राफ मार्क करके चिह्नित किया।
होटल लौटने के बाद सवाल लिखे और चुनिंदा 10-15 छात्रों को विशेष कोचिंग सेशन में डिक्टेट किए।
इस तरीके से कोई इलेक्ट्रॉनिक ट्रेल नहीं छोड़ा गया। बाद में एक आरोपी मनीषा संजय वाघमारे ने छात्रों से सवाल लेकर पूरा पेपर दोबारा तैयार करवाया और उसे बिचौलियों के नेटवर्क में बेचा।
CBI के अनुसार, कुलकर्णी ने अकेले इस लीक से कम से कम 21 लाख रुपये कमाए। पेपर महाराष्ट्र से राजस्थान, हरियाणा और अन्य राज्यों तक व्हाट्सऐप और टेलीग्राम के जरिए पहुंचा। बिचौलियों ने इसे लाखों रुपये में बेचा।
NTA की खामियां भी उजागर
चार्जशीट में NTA की प्रक्रियागत खामियों का भी जिक्र है। एजेंसी ने बताया कि एक्सपर्ट्स को फ्रिस्किंग नहीं किया जाता था, एक ही विशेषज्ञ को कई चरणों तक पहुंच मिल जाती थी और गोपनीय सेक्शन के CCTV फुटेज का बैकअप महज 20-25 दिनों का ही रखा जाता था। नतीजतन, महत्वपूर्ण अवधि का फुटेज उपलब्ध नहीं हो सका।
हालांकि, CBI ने स्पष्ट किया है कि NTA में संस्थागत भ्रष्टाचार का कोई सबूत नहीं मिला। लीक व्यक्तिगत लाभ और कोचिंग क्लासों की सफलता दर बढ़ाने के मकसद से किया गया।
क्या कहते हैं आरोप?
CBI की जांच अभी भी जारी है। कोर्ट में मुकदमा चल रहा है और आरोपों की पुष्टि होना बाकी है। इस मामले में कोचिंग संचालक, बिचौलिए और कुछ लाभार्थी अभ्यर्थी भी आरोपी बनाए गए हैं। इनमें पुणे और लातूर के कोचिंग संस्थानों से जुड़े लोग तथा कई मध्यस्थ शामिल हैं। CBI ने 360 गवाहों, 422 दस्तावेजों और 43 भौतिक साक्ष्यों का हवाला दिया है।
गौरतलब है कि मई 2026 में हुई NEET-UG परीक्षा में पेपर लीक के आरोपों के बाद परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी। देशभर में हुए प्रदर्शनों के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया था।
CBI की जांच अभी भी जारी है। कोर्ट में मुकदमा चल रहा है और आरोपों की पुष्टि होना बाकी है।
(यह रिपोर्ट CBI चार्जशीट और प्रमुख समाचार स्रोतों पर आधारित है।)
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