ब्यूरो रिपोर्ट नई दिल्ली| Dilli Times Media
नई दिल्ली, 7 अगस्त 2026: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) दिल्ली के डॉक्टरों ने एक अत्यंत जटिल और उच्च जोखिम वाले मामले में सफलता हासिल की है। 32 वर्षीय युवक विवेक सक्सेना (निवासी: करावल नगर, दिल्ली) का वजन 209 किलोग्राम था और वे ‘सुपर-सुपर ओबेसिटी’ तथा गंभीर ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (OSA) से पीड़ित थे। एम्स की मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम ने 32 दिनों की गहन तैयारी के बाद उनकी बेरिएट्रिक सर्जरी सफलतापूर्वक संपन्न की। सर्जरी के महज 13-14 दिनों के अंदर उनका वजन 49 किलो घटकर 160 किलोग्राम रह गया और वे सांस लेने वाली मशीन से भी मुक्त हो गए।
मरीज का बॉडी मास इंडेक्स (BMI) 74 kg/m² था। उन्हें उच्च रक्तचाप, प्री-डायबिटीज, डिसलिपिडेमिया, एसिड रिफ्लक्स, अवसाद और दोनों घुटनों में दर्द जैसी कई समस्याएं थीं। सबसे गंभीर समस्या स्लीप एपनिया की थी, जिसके कारण रात में उनकी सांस बार-बार रुक जाती थी। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि उन्हें इमरजेंसी ट्रैकियोस्टॉमी करानी पड़ी और वे लंबे समय तक CPAP मशीन पर निर्भर रहे।
एम्स के सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ. मंजूनाथ मारूति पोल के अनुसार, मरीज का पेट का घेरा 198 सेंटीमीटर था, जिससे उन्हें सामान्य ऑपरेशन टेबल पर सुरक्षित रूप से लिटाना भी संभव नहीं था। इसलिए ट्रैकियोस्टॉमी उनके बेड पर ही करनी पड़ी।
सर्जरी से पहले 32 दिनों तक मरीज को वेरी लो-कैलोरी डाइट (VLCD), सांस संबंधी फिजियोथेरेपी, संक्रमण नियंत्रण और पोषण संबंधी सलाह दी गई। इस दौरान उनका वजन 209 किलो से घटकर 172 किलो और पेट का घेरा 198 से 178 सेंटीमीटर हो गया। इससे साइड-एक्सटेंशन वाले संशोधित ऑपरेशन टेबल पर सर्जरी संभव हो सकी।
24 जुलाई 2026 को लैप्रोस्कोपिक वन एनास्टोमोसिस गैस्ट्रिक बाईपास (OAGB) सर्जरी की गई, जो लगभग दो घंटे दस मिनट में बिना किसी बड़ी जटिलता के पूरी हुई। सर्जरी के बाद मरीज को धीरे-धीरे CPAP सपोर्ट से हटाया गया। 13वें दिन तक वे स्वतंत्र रूप से सांस लेने, बिना सहारे चलने और अपनी देखभाल स्वयं करने में सक्षम हो गए। छुट्टी के समय उनका वजन 160 किलो और पेट का घेरा 155 सेंटीमीटर रह गया था।
डॉक्टरों का कहना है कि यह मामला साबित करता है कि सुपर-सुपर ओबेसिटी और लंबे समय तक वेंटिलेटरी सपोर्ट की जरूरत वाले मरीजों में भी सावधानीपूर्वक प्री-ऑपरेटिव अनुकूलन और समन्वित टीम वर्क से बेरिएट्रिक सर्जरी सुरक्षित रूप से की जा सकती है। मरीज को एम्स से छुट्टी दे दी गई है और नियमित फॉलो-अप जारी है। सही आहार और जीवनशैली अपनाने पर आने वाले एक वर्ष में वजन और काफी कम होने की उम्मीद है।
यह सफलता एम्स दिल्ली की बेरिएट्रिक और मेटाबॉलिक सर्जरी टीम के समर्पण और विशेषज्ञता का परिचायक है।
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