लखनऊ | दिल्ली टाइम्स मीडिया ब्यूरो
उत्तर प्रदेश में NEET UG Counselling 2026 शुरू होने से पहले मेडिकल प्रवेश नीति को लेकर छात्रों और अभिभावकों की ओर से नई मांग सामने आई है। दिल्ली टाइम्स मीडिया से बातचीत में कई छात्रों, अभिभावकों और मेडिकल अभ्यर्थियों ने कहा कि उत्तर प्रदेश के प्राइवेट मेडिकल एवं डेंटल कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया के पहले दो राउंड केवल उत्तर प्रदेश के बोनाफाइड (डोमिसाइल) छात्रों के लिए आयोजित किए जाने चाहिए।
छात्रों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी अन्य राज्य के विद्यार्थियों का विरोध करना नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश के छात्रों को अपने ही राज्य के मेडिकल कॉलेजों में शुरुआती चरण में उचित अवसर मिलना चाहिए।
“इंजीनियरिंग में जब डोमिसाइल प्राथमिकता है, तो मेडिकल में क्यों नहीं?”
दिल्ली टाइम्स मीडिया से बातचीत में छात्रों ने कहा कि उत्तर प्रदेश में UPTAC (पूर्व में UPJEE/AKTU) के माध्यम से होने वाली इंजीनियरिंग एवं तकनीकी संस्थानों की काउंसलिंग में स्थानीय छात्रों को प्राथमिकता दी जाती है। उनका सवाल है कि यदि तकनीकी शिक्षा में राज्य के छात्रों के हितों की रक्षा के लिए ऐसी व्यवस्था लागू की जा सकती है, तो मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया में भी इसी प्रकार की नीति पर विचार क्यों नहीं किया जा सकता।
क्या है छात्रों की मुख्य चिंता?
छात्रों का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में उत्तर प्रदेश के प्राइवेट मेडिकल एवं डेंटल कॉलेजों की काउंसलिंग में पहले ही राउंड से अन्य राज्यों के पात्र अभ्यर्थी भी आवेदन कर सकते हैं। उनका मानना है कि इससे उत्तर प्रदेश के हजारों छात्र, जिन्होंने अपनी पूरी स्कूली शिक्षा राज्य में प्राप्त की है, पहले चरण से ही ऑल इंडिया स्तर की प्रतिस्पर्धा का सामना करते हैं।
एक अभिभावक ने दिल्ली टाइम्स मीडिया से कहा,
“हम किसी भी राज्य के छात्रों के खिलाफ नहीं हैं। हमारी केवल यह मांग है कि पहले दो राउंड में उत्तर प्रदेश के छात्रों को प्राथमिकता मिले। यदि उसके बाद सीटें खाली रहती हैं, तो उन्हें पूरे देश के अभ्यर्थियों के लिए खोल दिया जाए। इससे किसी भी सीट के खाली रहने की संभावना भी नहीं रहेगी।”
छात्रों ने अन्य राज्यों का दिया उदाहरण
दिल्ली टाइम्स मीडिया से बातचीत में छात्रों ने दावा किया कि कई राज्यों में स्थानीय छात्रों को प्राथमिकता देने की व्यवस्था लागू है।
राजस्थान
छात्रों का कहना है कि राजस्थान में शुरुआती दो काउंसलिंग राउंड में राज्य के डोमिसाइल छात्रों को प्राथमिकता दी जाती है, जबकि अन्य राज्यों के उम्मीदवारों के लिए अवसर बाद के चरणों में उपलब्ध होते हैं।
मध्य प्रदेश
छात्रों के अनुसार, मध्य प्रदेश में भी शुरुआती दो राउंड में पहले राज्य के पात्र (डोमिसाइल) अभ्यर्थियों को अवसर मिलता है। बाद के चरणों में रिक्त सीटों के अनुसार अन्य राज्यों के उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं।
महाराष्ट्र
छात्रों का कहना है कि महाराष्ट्र में राज्य कोटा की सीटों के लिए स्थानीय पात्रता लागू रहती है, जबकि अन्य राज्यों के अधिकांश अभ्यर्थी मैनेजमेंट या संस्थागत (Institutional) कोटा के माध्यम से आवेदन करते हैं।
गुजरात
छात्रों का दावा है कि गुजरात की राज्य काउंसलिंग में डोमिसाइल नियम काफी सख्त हैं और स्थानीय छात्रों को प्राथमिकता दी जाती है।
नोट: विभिन्न राज्यों की पात्रता और काउंसलिंग नियम संबंधित वर्ष की आधिकारिक काउंसलिंग पुस्तिका के अनुसार निर्धारित होते हैं।
छात्रों ने सुझाया 4-स्टेज काउंसलिंग मॉडल
दिल्ली टाइम्स मीडिया से बातचीत में छात्रों ने उत्तर प्रदेश सरकार के लिए एक चरणबद्ध मॉडल भी सुझाया—
- Round 1: केवल उत्तर प्रदेश के बोनाफाइड डोमिसाइल अभ्यर्थियों के लिए।
- Round 2: यदि सीटें रिक्त रहें तो पुनः केवल उत्तर प्रदेश डोमिसाइल छात्रों के लिए।
- Mop-Up Round: पूरे देश के सभी पात्र NEET अभ्यर्थियों के लिए।
- Stray Vacancy Round: शेष सभी सीटें ऑल इंडिया उम्मीदवारों के लिए उपलब्ध कराई जाएं।
छात्रों का कहना है कि इससे उत्तर प्रदेश के विद्यार्थियों को शुरुआती अवसर मिलेगा, वहीं बाद के चरणों में कोई भी मेडिकल सीट खाली नहीं रहेगी।
सरकार से क्या है मांग?
छात्रों और अभिभावकों ने दिल्ली टाइम्स मीडिया के माध्यम से उत्तर प्रदेश सरकार और DGME से अपील की है कि UP NEET Counselling 2026 शुरू होने से पहले इस मांग पर गंभीरता से विचार किया जाए।
हालांकि, अब तक उत्तर प्रदेश सरकार या DGME की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक निर्णय या अधिसूचना जारी नहीं की गई है। वर्तमान में काउंसलिंग प्रक्रिया आधिकारिक नियमों के अनुसार ही संचालित होगी।
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