NMC का बड़ा फैसला: 800 से ज्यादा मेडिकल कॉलेजों को Conditional Renewal, 45 दिन में दूर करनी होंगी कमियां

दिल्ली शिक्षा स्वास्थ्य

नई दिल्ली | 11 जुलाई 2026

देशभर के मेडिकल कॉलेजों के लिए बड़ी राहत देते हुए National Medical Commission (NMC) ने 2026-27 शैक्षणिक सत्र के लिए 800 से अधिक मेडिकल कॉलेजों को MBBS सीटों के लिए Conditional Renewal Letter जारी कर दिए हैं। हालांकि यह मंजूरी पूरी तरह अंतिम नहीं है। जिन कॉलेजों में बुनियादी ढांचे, फैकल्टी या क्लीनिकल सुविधाओं से जुड़ी कमियां पाई गई हैं, उन्हें इन्हें दूर करने के लिए 45 दिनों का समय दिया गया है।

क्या है NMC का नया नियम?

NMC ने मेडिकल कॉलेजों के निरीक्षण (Inspection) की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। पहले हर साल नियमित निरीक्षण के बाद ही सीटों का नवीनीकरण किया जाता था, लेकिन अब Conditional Renewal की व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत कॉलेजों को पहले अस्थायी मंजूरी दी जाएगी और बाद में Surprise Physical, Virtual या Hybrid Assessment के जरिए उनकी जांच होगी।

45 दिन में सुधार करना होगा

NMC के अनुसार जिन कॉलेजों में फैकल्टी, इंफ्रास्ट्रक्चर, अस्पताल सुविधाओं या अन्य मानकों में कमी पाई गई है, उन्हें 45 दिनों के भीतर सभी कमियां दूर करनी होंगी। इसके बाद मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड (MARB) दोबारा निरीक्षण करेगा।

नियम नहीं मानने पर होगी कार्रवाई

यदि दोबारा निरीक्षण के दौरान कमियां बरकरार रहती हैं तो NMC संबंधित कॉलेजों के खिलाफ सख्त कदम उठा सकता है। इसमें MBBS सीटों की संख्या घटाना, सीटें वापस लेना या नए दाखिलों पर रोक जैसी कार्रवाई भी शामिल हो सकती है।

क्यों किया गया बदलाव?

NMC का कहना है कि पहले कई कॉलेज केवल तय तारीख के निरीक्षण से पहले व्यवस्था सुधारते थे। नई व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मेडिकल कॉलेज पूरे वर्ष निर्धारित मानकों का पालन करें, ताकि छात्रों को बेहतर मेडिकल शिक्षा और प्रशिक्षण मिल सके।

छात्रों पर क्या होगा असर?

फिलहाल MBBS में प्रवेश प्रक्रिया जारी रहेगी और छात्रों के एडमिशन पर तत्काल कोई असर नहीं पड़ेगा। हालांकि जिन कॉलेजों में बाद की जांच में गंभीर कमियां पाई जाएंगी, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

निष्कर्ष

NMC का यह फैसला मेडिकल शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और गुणवत्ता बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अब मेडिकल कॉलेजों को केवल निरीक्षण के समय नहीं, बल्कि पूरे वर्ष निर्धारित मानकों का पालन करना होगा। इससे मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार और छात्रों को बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद है।

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