ब्यूरो रिपोर्ट नई दिल्ली|DTM
लखनऊ, बुधवार 9 सितंबर 2026: उत्तर प्रदेश सरकार ने राजस्व अदालतों में लंबित मामलों के समयबद्ध निस्तारण में अपेक्षित प्रगति न होने पर सख्त कार्रवाई की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर राजस्व परिषद ने पांच तहसीलदारों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है, जबकि 13 तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
निलंबित अधिकारियों में हरदोई की संडीला तहसील के तहसीलदार अमित यादव, देवरिया के तहसीलदार कृष्ण कुमार मिश्रा, जौनपुर के तहसीलदार सौरभ कुमार, अयोध्या के तत्कालीन नायब तहसीलदार (वर्तमान में गाजीपुर के तहसीलदार) रंजन वर्मा तथा प्रतापगढ़ के तहसीलदार अलख शुक्ला शामिल हैं।
यह कार्रवाई 7 सितंबर को प्रदेश के सभी राजस्व न्यायालयों में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता-2006 की धारा-34 के तहत दाखिल वादों की तहसीलवार और अधिकारीवार गहन समीक्षा के बाद की गई। समीक्षा में पाया गया कि कई अधिकारियों द्वारा लंबित मामलों के निस्तारण में अपेक्षित गति नहीं दिखाई गई।
राजस्व विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री ने 29 अगस्त को हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए थे कि राजस्व अदालतों में लंबित मामलों, विशेषकर नामांतरण संबंधी वादों का निपटान समयबद्ध तरीके से सुनिश्चित किया जाए। सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
गौरतलब है कि इससे पहले 1 सितंबर को भी इसी कारण चार तहसीलदारों और एक नायब तहसीलदार को निलंबित किया जा चुका है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि राजस्व मामलों के शीघ्र निस्तारण के लिए निरंतर निगरानी जारी रहेगी और आवश्यक प्रगति न होने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ नियमों के अनुसार आगे भी कार्रवाई की जाएगी।
यह कदम आम नागरिकों को राजस्व संबंधी मामलों में शीघ्र और पारदर्शी न्याय दिलाने की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
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