कौशांबी में अवैध पटाखा फैक्ट्री में भीषण विस्फोट, 8 बच्चों समेत 11 की मौत; प्रशासन ने आरोपी के गोदाम पर चलाया बुलडोजर

उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य

ब्यूरो रिपोर्ट नई दिल्ली| DTM

रिहायशी इलाके में बिना पर्याप्त सुरक्षा पटाखों के निर्माण और भंडारण का आरोप, कई मकान क्षतिग्रस्त; पुलिसकर्मियों पर भी कार्रवाई

कौशांबी, उत्तर प्रदेश | 1 सितंबर 2026

उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में सोमवार, 31 अगस्त को अवैध रूप से संचालित पटाखा फैक्ट्री/गोदाम में हुए भीषण विस्फोट ने पूरे इलाके को दहला दिया। मोहम्मदपुर मनौरी/चिल्ला शहबाजी गांव में हुए इस हादसे में 8 बच्चों समेत 11 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल बताए जा रहे हैं। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि आसपास के कई मकानों को भी भारी नुकसान पहुंचा।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, रिहायशी इलाके में बड़े पैमाने पर पटाखों के निर्माण और भंडारण का काम किया जा रहा था। आरोप है कि फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया था और पर्याप्त लाइसेंस/अनुमतियों के बिना पटाखों का कारोबार चल रहा था। कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि संबंधित फैक्ट्री का लाइसेंस पहले ही निरस्त या निलंबित किया जा चुका था।

मुख्य आरोपी के परिवार के खिलाफ FIR

मामले में मुख्य आरोपी बताए जा रहे मोहम्मद आदिल उर्फ डीजे के परिवार के सदस्यों के खिलाफ पुलिस ने विस्फोटक अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है।

एफआईआर में नौशाद/नौशेब, शकील, शबाना, कहकशा बानो और साइना के नाम शामिल बताए गए हैं। पुलिस मामले में आरोपियों की भूमिका और फैक्ट्री में पटाखों के निर्माण एवं भंडारण से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है।

बताया जा रहा है कि घटना के बाद कुछ आरोपियों को हिरासत में लिया गया है, जबकि अन्य आरोपी फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस उनकी तलाश में जुटी है।

आरोपी के गोदाम पर चला बुलडोजर

हादसे के बाद प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी आदिल से जुड़े गोदाम को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया। कुछ रिपोर्टों में आरोपी के घर को भी ध्वस्त किए जाने की जानकारी सामने आई है।

प्रशासन की ओर से आरोपियों की संपत्ति जब्त करने और उनके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू किए जाने की बात कही गई है।

पुलिसकर्मियों पर भी गिरी गाज

पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोट के मामले में पुलिस की भूमिका और कथित लापरवाही को लेकर भी कार्रवाई की गई है। पिपरी थाना प्रभारी विकास सिंह, चायल चौकी प्रभारी अमित द्विवेदी और पूर्व चौकी प्रभारी मनीष पाल को लाइन हाजिर किया गया है। वहीं, दो सिपाहियों को निलंबित किए जाने की जानकारी है।

प्रशासन अब यह जांच कर रहा है कि रिहायशी इलाके में इतनी बड़ी मात्रा में पटाखों का निर्माण और भंडारण किसकी अनुमति से किया जा रहा था और संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी थी या नहीं।

मुख्यमंत्री ने मुआवजे का किया ऐलान

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए मृतकों के परिवारों को 2-2 लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हादसे पर दुख व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जताई है।

जांच के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर

पुलिस और प्रशासन की जांच में अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि फैक्ट्री में कितनी मात्रा में विस्फोटक सामग्री और पटाखे रखे गए थे, उनके भंडारण की अनुमति थी या नहीं और सुरक्षा नियमों का कितना पालन किया जा रहा था।

इस भीषण हादसे ने एक बार फिर रिहायशी इलाकों में अवैध रूप से पटाखों के निर्माण और भंडारण पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच पूरी होने के बाद हादसे की वास्तविक वजह और जिम्मेदार लोगों की भूमिका स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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