ब्यूरो रिपोर्ट नई दिल्ली|DTM
22 वर्ष पुराने भूमि अधिग्रहण विवाद में किसानों का ऐलान—“जहां की जमीन, वहीं का मुआवजा”
गाजियाबाद/इंदिरापुरम | 30 अगस्त 2026: गाजियाबाद के इंदिरापुरम क्षेत्र स्थित कनावनी (मोहिद्दीनपुर कनावनी) गांव में भूमि अधिग्रहण के उचित मुआवजे की मांग को लेकर किसानों का अनिश्चितकालीन धरना लगातार जारी है। किसान कनावनी की जमीन का मुआवजा उसी क्षेत्र के प्रचलित सर्किल रेट के आधार पर दिए जाने की मांग पर अड़े हुए हैं। किसानों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक धरना समाप्त नहीं किया जाएगा।
किसानों का मुख्य नारा है—“जहां की जमीन, वहीं का मुआवजा; उचित मुआवजा नहीं तो जमीन नहीं।” किसानों का कहना है कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हुए करीब 22 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन उन्हें अब तक उनकी जमीन का उचित मूल्य नहीं मिल सका है।
2004 में शुरू हुआ था भूमि अधिग्रहण विवाद
किसानों के अनुसार, वर्ष 2004 में गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) ने इंदिरापुरम एक्सटेंशन टाउनशिप के लिए कनावनी गांव की करीब 229 एकड़ भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की थी। किसानों का आरोप है कि अधिग्रहण के दौरान जमीन के बाजार मूल्य की तुलना में काफी कम दर पर मुआवजा निर्धारित करने का प्रयास किया गया।
मुआवजे की दर को लेकर असहमति के बाद किसानों ने न्यायालय का रुख किया और पिछले दो दशकों से अधिक समय से कानूनी लड़ाई जारी रखी।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद फिर तेज हुआ विवाद
किसानों का कहना है कि अक्टूबर 2025 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन से संबंधित वर्ष 2013 के कानून के प्रावधानों के तहत मुआवजे को लेकर आदेश दिया था। किसानों का दावा है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुरूप उन्हें 1 जनवरी 2020 के सर्किल रेट को आधार बनाकर मुआवजा दिया जाना चाहिए।
हालांकि, किसानों का आरोप है कि जीडीए कनावनी की भूमि का मूल्यांकन कनावनी के बजाय पड़ोसी गांव की अपेक्षाकृत कम दर के आधार पर करने का प्रयास कर रहा है। यही मुद्दा मौजूदा आंदोलन का प्रमुख कारण बना हुआ है।
किसानों की प्रमुख मांगें
धरने पर बैठे किसानों ने प्रशासन के सामने कई मांगें रखी हैं। इनमें प्रमुख रूप से—
- कनावनी की भूमि का मुआवजा कनावनी के प्रचलित सर्किल रेट के आधार पर निर्धारित किया जाए।
- आबादी वाली जमीन को अधिग्रहण से बाहर रखा जाए।
- किसानों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को वापस लिया जाए।
- यदि उचित मुआवजा नहीं दिया जाता है तो अधिग्रहित भूमि किसानों को वापस की जाए।
- मुआवजा निर्धारण में संबंधित गांव की वास्तविक भूमि दर को ही आधार बनाया जाए।
प्रशासन से वार्ता के बावजूद नहीं टूटा गतिरोध
किसानों के अनुसार, 18-19 अगस्त के आसपास एडीएम और एसडीएम सहित प्रशासनिक अधिकारी धरना स्थल पर पहुंचे थे। अधिकारियों ने समस्या के समाधान के लिए करीब एक महीने का समय मांगा था। हालांकि, किसानों का कहना है कि उन्हें लिखित आश्वासन नहीं मिला, जिसके चलते आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया गया।
किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बातचीत के बाद कुछ स्थानों पर बुलडोजर की कार्रवाई की गई। इसको लेकर किसानों में नाराजगी और बढ़ गई है।
पंचायत और महापंचायत की तैयारी
धरने के बीच गांव में किसानों की पंचायत और महापंचायत की तैयारियां भी चल रही हैं। किसानों का कहना है कि यदि उनकी मांगों का समाधान जल्द नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जा सकता है।
फिलहाल किसान शांतिपूर्ण तरीके से धरना जारी रखे हुए हैं। उनका कहना है कि कनावनी की जमीन का मुआवजा कनावनी के उचित सर्किल रेट के आधार पर तय होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
वहीं, पूरे मामले में प्रशासन और जीडीए का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।
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