ब्यूरो रिपोर्ट नई दिल्ली|DTM
नई दिल्ली, 17 अक्टूबर 2026: शारदीय नवरात्रि के सातवें दिन शनिवार को मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना की जा रही है। देवी मंदिरों में श्रद्धालु दर्शन-पूजन कर सुख-समृद्धि, शांति और निर्भय जीवन की कामना कर रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कालरात्रि दुष्ट शक्तियों का विनाश कर भक्तों को अभय प्रदान करती हैं।
मां कालरात्रि का स्वरूप उग्र और तेजस्वी है। उनका वर्ण श्याम, केश बिखरे हुए और तीन नेत्र हैं। वे गर्दभ पर सवार रहती हैं। मान्यता है कि उनका यह स्वरूप अधर्म, अज्ञान और नकारात्मक शक्तियों के अंत का प्रतीक है। भयावह रूप के बावजूद देवी अपने भक्तों के लिए कल्याणकारी हैं, इसी कारण उन्हें ‘शुभंकरी’ भी कहा जाता है।
गुड़ का भोग, मंत्र जाप का विधान
नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि को गुड़ या गुड़ से बने मिष्ठान्न का भोग अर्पित करने की परंपरा है। श्रद्धालु ‘ॐ देवी कालरात्र्यै नमः’ मंत्र का जाप कर देवी से शक्ति, साहस और संकटों से रक्षा की प्रार्थना करते हैं। इस दिन का पारंपरिक रंग स्लेटी (ग्रे) माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं में मां कालरात्रि की उपासना को भय से मुक्ति, आत्मबल और दृढ़ संकल्प से जोड़कर देखा जाता है। देवी का स्वरूप संदेश देता है कि विपरीत परिस्थितियों में भी सत्य और धर्म के मार्ग पर अडिग रहना चाहिए।
नवरात्रि का सातवां दिन साधना, श्रद्धा और आत्मशक्ति के संकल्प का अवसर है। भक्त मां कालरात्रि से परिवार की सुख-शांति और जीवन में सकारात्मकता बनाए रखने की कामना कर रहे हैं।
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