दिल्ली के जगतपुर में स्कूल से लौट रहे तीन बच्चे खुले नाले में गिरे, स्थानीय लोगों ने बचाई जान

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ब्यूरो रिपोर्ट नई दिल्ली|Dilli Times Media

सीसीटीवी में कैद दिल दहला देने वाली घटना, प्रशासन की तैयारियों पर उठे सवाल
नई दिल्ली, 7 अगस्त 2026:राजधानी दिल्ली के उत्तरी हिस्से में गुरुवार दोपहर एक बड़ा हादसा होने से बाल-बाल बचा। वजीराबाद थाना क्षेत्र के जगतपुर गांव में स्कूल से घर लौट रहे तीन स्कूली बच्चे बारिश के पानी से भरे खुले फ्लड ड्रेन में गिर गए। गनीमत रही कि मौके पर मौजूद स्थानीय लोगों और एक ऑटो चालक की तत्परता से तीनों बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। घटना का सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
क्या हुआ था?
6 अगस्त 2026 को दोपहर करीब 12:47 बजे की बात है। स्कूल की छुट्टी के बाद लगभग 10 बच्चे स्कूल यूनिफॉर्म में पैदल घर लौट रहे थे। सुबह हुई बारिश के कारण सड़क पर पानी घुटनों तक जमा था और कई वाहन फंसे हुए थे। बारिश के पानी में नाला पूरी तरह छिपा हुआ था। बच्चे सड़क समझकर आगे बढ़ रहे थे कि अचानक तीन बच्चे एक-एक कर गहरे नाले में समा गए।
सीसीटीवी फुटेज में साफ दिखता है कि बच्चे संतुलन खोकर नाले में गिरते हैं। बाकी बच्चे पीछे भागते हैं और एक लड़की जोर-जोर से चिल्लाती हुई पीछे वालों को खतरे के बारे में चेतावनी देती है। कुछ ही सेकंड में अफरा-तफरी मच जाती है।
कैसे बची जान?
हादसे के समय सड़क पर ट्रैफिक जाम लगा हुआ था। इसी वजह से आसपास मौजूद लोगों की नजर तुरंत बच्चों पर पड़ी। एक ऑटो चालक बिना वक्त गंवाए नाले में उतर गया और बच्चों को बाहर निकालने लगा। स्थानीय निवासियों और राहगीरों ने भी उसका साथ दिया। लोगों ने हाथ पकड़कर एक-एक कर तीनों बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। वक्त रहते मदद मिलने से बड़ा हादसा टल गया।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, “तीनों बच्चों को आम लोगों ने बचाया। इस मामले में कोई पीसीआर कॉल या औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं हुई।”
प्रशासन पर सवाल
यह घटना दिल्ली में खुले नालों और मानसून में जलभराव की पुरानी समस्या को फिर से उजागर करती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के मौसम में नालों की सीमा पहचानना मुश्किल हो जाता है। प्रशासन हर साल नालों को ढकने और सुरक्षा इंतजाम मजबूत करने के दावे करता है, लेकिन कई जगहों पर फ्लड ड्रेन अभी भी खुले पड़े हैं।
विशेषज्ञों और स्थानीय निवासियों का मानना है कि संवेदनशील जगहों पर बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड और बेहतर जल निकासी व्यवस्था की सख्त जरूरत है। पिछले कुछ वर्षों में दिल्ली-एनसीआर में जलभराव और खुले नालों से जुड़े कई हादसे हो चुके हैं, जिनमें बच्चों की जान भी गई है।
तीनों बच्चे सुरक्षित तो हैं, लेकिन घटना से वे डरे और सहमे हुए हैं। यह मामला एक बार फिर याद दिलाता है कि राजधानी में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन को और सक्रिय होना होगा।

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