ब्यूरो रिपोर्ट नई दिल्ली|DTM
पुलिस का दावा: बाजार, शराब ठेकों और टोल प्लाजा पर छह महीने में ₹70 करोड़ से अधिक के नकली सिक्के खपाए गए
सहारनपुर, 13 सितंबर 2026: उत्तर प्रदेश पुलिस की शहर कोतवाली, विशेष अभियान समूह (एसओजी) और सर्विलांस टीम ने रविवार को नकली बीस रुपये के सिक्के बनाने और उन्हें बाजार में चलाने वाले एक अंतर्राज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया। पुलिस ने गिरोह के पाँच सदस्यों को गिरफ्तार किया तथा निर्माण मशीनें, डाई और बड़ी संख्या में नकली सिक्के बरामद किए।
जांच में पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने पूछताछ में स्वीकार किया कि वे पिछले करीब छह महीनों में बाजार के साथ सरकारी शराब ठेकों और टोल प्लाजा पर ₹70 करोड़ से अधिक मूल्य के नकली सिक्के खपा चुके हैं। गिरोह का नेटवर्क उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब और झारखंड तक फैला बताया जा रहा है।
बरामदगी और कार्रवाई
पुलिस के अनुसार आरोपियों के कब्जे से बीस-बीस रुपये के 6,400 नकली सिक्के बरामद हुए, जिनकी अंकित कीमत ₹1.28 लाख है। इसके अलावा अधबने सिक्के, सिक्के तैयार करने वाली छह मशीनें, लोहे की पाँच डाई, बिना मुहर की 39 डाई, मुहर लगी 20 डाई, दो कारें, मोबाइल फोन और अन्य उपकरण जब्त किए गए। नगर कोतवाली थाने में मामला दर्ज कर लिया गया है।
यह कार्रवाई 12 सितंबर को हुई छोटी बरामदगी के बाद हुई, जब पुलिस ने करीब ₹1.20 लाख मूल्य के नकली सिक्कों के साथ दो युवकों को हिरासत में लिया था। उसी सूत्र से पूछताछ बढ़ाते हुए टीम ने निर्माण और वितरण श्रृंखला तक पहुँच बनाई।
गिरफ्तार आरोपी
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह (मोहाली), हिमांशु उर्फ गुल्लू (बरसी, सहारनपुर), कुलदीप (मुजफ्फरनगर), संतोष चौरसिया उर्फ जनार्दन (मधुबनी, बिहार) और अनुराग पाल उर्फ लंकेश (संत रविदास नगर) के रूप में हुई है। पुलिस ने बताया कि अन्य सदस्यों की पहचान और धरपकड़ जारी है।
पुलिस का पक्ष
एसएसपी अभिनंदन सिंह के हवाले से स्थानीय रिपोर्टों में कहा गया है कि आरोपी मशीन और डाई की मदद से नकली सिक्के तैयार कर उन्हें खुले बाजार के अलावा शराब ठेकों और टोल पर चलाते थे। पुलिस ने स्पष्ट किया कि ₹70 करोड़ का आँकड़ा आरोपियों के बयान पर आधारित है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि जांच का हिस्सा होगी।
सहारनपुर में हाल ही में पंजाब नेशनल बैंक की करेंसी चेस्ट से ₹17.29 करोड़ के नकली नोट मिलने का मामला भी चल रहा है, जिसकी जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी कर रही है। पुलिस ने दोनों प्रकरणों को फिलहाल अलग-अलग बताया है। किसी भी संबंध की पुष्टि के बिना अटकलें लगाना उचित नहीं होगा।
जनहित चेतावनी
अधिकारियों का सुझाव है कि नागरिक बीस रुपये के सिक्के लेते समय वजन, किनारे की बनावट और सरकारी चिह्न पर ध्यान दें। संदेह होने पर सिक्के बैंक या निकटतम थाने में जमा कराएँ। नकली मुद्रा बनाना, रखना या चलाना गंभीर अपराध है।
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