गंगा-यमुना का रौद्र रूप, प्रयागराज की तटीय बस्तियों में घुसा पानी

उत्तर प्रदेश लाइफस्टाइल

ब्यूरो रिपोर्ट नई दिल्ली|DTM

निचले इलाकों में बढ़ी चिंता, 26 राहत शिविर और 98 बाढ़ चौकियां सक्रिय; प्रशासन ने अगले 24 घंटे को बताया अहम

प्रयागराज, 1 सितंबर 2026: संगम नगरी प्रयागराज में गंगा और यमुना नदियों के बढ़ते जलस्तर ने नदी किनारे बसे इलाकों में चिंता बढ़ा दी है। लगातार बढ़ रहे पानी के चलते कई तटीय और निचले इलाकों में पानी घरों तक पहुंचने लगा है। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने राहत एवं बचाव व्यवस्था को सक्रिय कर दिया है। निचले इलाकों में रहने वाले लोग सुरक्षित स्थानों की ओर जाने के लिए सामान समेटने लगे हैं।

बाढ़ नियंत्रण कक्ष के आंकड़ों के मुताबिक 31 अगस्त को फाफामऊ में गंगा का जलस्तर 82.62 मीटर से बढ़कर 82.72 मीटर तक पहुंच गया। वहीं नैनी में यमुना का जलस्तर 82.20 मीटर से बढ़कर 82.92 मीटर दर्ज किया गया। छतनाग में भी गंगा का जलस्तर 81.68 मीटर से ऊपर पहुंच गया है। प्रयागराज में गंगा का खतरे का निशान 84.734 मीटर और चेतावनी स्तर करीब 83.73 मीटर है।

हालांकि दोनों नदियां अभी खतरे के निशान से करीब दो मीटर नीचे बह रही हैं, लेकिन बीते 24 घंटों में जलस्तर में हुई तेज वृद्धि ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। इस दौरान गंगा के जलस्तर में एक मीटर से अधिक और यमुना में करीब 67 सेंटीमीटर तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

तटीय इलाकों में पहुंचा पानी

बढ़ते जलस्तर का असर छोटा बघाड़ा, बड़ा बघाड़ा, राजापुर, दारागंज, रसूलाबाद, सलोरी, करेली, नैनी, फाफामऊ और झूंसी समेत कई नदी किनारे के इलाकों में दिखाई दे रहा है। कई घरों के बाहर पानी जमा हो गया है, जबकि कुछ स्थानों पर पानी घरों के अंदर तक पहुंच गया है।

दशाश्वमेध घाट और संगम क्षेत्र की सड़कें भी जलमग्न हो गई हैं। नागवासुकि मंदिर के सामने का रास्ता पानी भरने के कारण बंद हो गया है। झूंसी के आसपास के कुछ गांवों में लोगों की आवाजाही के लिए नावों की व्यवस्था की गई है।

26 राहत शिविर और 98 बाढ़ चौकियां सक्रिय

स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने राहत एवं बचाव तंत्र को सक्रिय कर दिया है। जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा के अनुसार संवेदनशील स्थानों पर एनडीआरएफ, पीएसी, बाढ़ नियंत्रण और जल पुलिस की टीमें तैनात की गई हैं।

शहर में 26 राहत शिविर खोले गए हैं, जबकि जिले की छह तहसीलों में 98 बाढ़ चौकियां सक्रिय कर दी गई हैं। प्रशासन के मुताबिक फिलहाल बड़े पैमाने पर आबादी प्रभावित नहीं हुई है, लेकिन अगले 24 घंटे स्थिति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

ऊपरी इलाकों की बारिश और बांधों से छोड़ा जा रहा पानी बना वजह

प्रशासन के अनुसार गंगा-यमुना के बढ़ते जलस्तर के पीछे ऊपरी क्षेत्रों में हो रही बारिश के साथ विभिन्न बैराज और बांधों से छोड़ा जा रहा पानी भी प्रमुख कारण है। कानपुर बैराज, नरोरा बांध, माताटीला और हथिनीकुंड से छोड़े जा रहे पानी का असर नदियों के जलस्तर पर पड़ रहा है।

वहीं टोंस और बेलन नदियों के कछारी इलाकों में भी रेड अलर्ट जारी किया गया है। प्रशासन की टीमें लगातार जलस्तर और संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी कर रही हैं।

प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की

प्रशासन ने नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। लोगों को अनावश्यक रूप से घाटों और जलभराव वाले क्षेत्रों में नहीं जाने तथा स्थिति बिगड़ने पर तत्काल राहत शिविरों में पहुंचने की सलाह दी गई है।

प्रशासन का कहना है कि जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर राहत एवं बचाव कार्य को और तेज किया जाएगा।

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