पीएम केयर्स फंड की राशि से ग्रामीण स्कूलों के कायाकल्प की मांग, अभिजीत दीपके ने प्रधानमंत्री से की अपील

दिल्ली राजनीति शिक्षा

ब्यूरो रिपोर्ट नई दिल्ली| Dilli Times Media

नई दिल्ली 19 अगस्त 2026: पीएम केयर्स फंड में उपलब्ध हजारों करोड़ रुपये की राशि के उपयोग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाएं सुधारने और आधुनिक मॉडल स्कूल विकसित करने की अपील की है। दीपके ने कहा कि देश के ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में सरकारी स्कूल आज भी पेयजल, बेहतर फर्नीचर, सड़क संपर्क और अन्य आवश्यक सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं।

दीपके ने सोशल मीडिया पर जारी वीडियो संदेश में पीएम केयर्स फंड में उपलब्ध राशि के उपयोग पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब देश के कई हिस्सों में बच्चों को बेहतर स्कूल सुविधाओं की आवश्यकता है, ऐसे में फंड की राशि का उपयोग शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में किया जा सकता है। उन्होंने उपलब्ध राशि से बड़ी संख्या में आधुनिक सुविधाओं से युक्त मॉडल स्कूल विकसित किए जाने की संभावना भी जताई।

8,452 करोड़ रुपये से अधिक राशि का दावा

दीपके द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, 31 मार्च 2025 तक पीएम केयर्स फंड में करीब ₹8,452.07 करोड़ का बैलेंस था। इसमें बड़ी राशि फिक्स्ड डिपॉजिट में तथा शेष राशि बचत खाते में रखे जाने का उल्लेख किया गया है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में फंड से हुए भुगतान को भी उन्होंने अपेक्षाकृत कम बताते हुए इसके व्यापक सामाजिक उपयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।

दीपके का कहना है कि यदि आधुनिक सुविधाओं से युक्त एक मॉडल स्कूल के निर्माण की अनुमानित लागत करीब ₹8 करोड़ मानी जाए, तो उपलब्ध राशि से देश के विभिन्न हिस्सों में 1,000 से अधिक मॉडल स्कूल विकसित किए जा सकते हैं। हालांकि, स्कूल निर्माण की वास्तविक लागत स्थान, भूमि, भवन के आकार और उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं के आधार पर अलग-अलग हो सकती है।

ग्रामीण स्कूलों की बदहाल स्थिति का मुद्दा उठाया

अभिजीत दीपके ने दावा किया कि उन्होंने महाराष्ट्र के ग्रामीण क्षेत्रों के कई सरकारी स्कूलों का दौरा किया है। उनके अनुसार, कुछ स्कूलों में विद्यार्थियों के लिए पेयजल, बैठने की पर्याप्त व्यवस्था, सड़क संपर्क और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी देखने को मिली। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के लिए बेहतर बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल होना चाहिए।

उन्होंने प्रधानमंत्री से अपील करते हुए कहा कि पीएम केयर्स फंड जैसी सार्वजनिक पहल के माध्यम से शिक्षा और गरीब परिवारों के बच्चों से जुड़े क्षेत्रों में भी प्रभावी निवेश किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि बेहतर स्कूल केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं होने चाहिए, बल्कि उनमें आधुनिक कक्षाएं, डिजिटल शिक्षा, स्वच्छ पेयजल, शौचालय, पुस्तकालय, प्रयोगशाला और विद्यार्थियों के अनुकूल अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

‘स्कूल ठीक करो’ अभियान का भी जिक्र

दीपके ने अपने हालिया ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान का जिक्र करते हुए सरकारी स्कूलों की स्थिति में सुधार को लेकर जनजागरूकता बढ़ाने की बात कही। उनका जोर विशेष रूप से ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर क्षेत्रों के विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराने पर है।

पीएम केयर्स फंड की स्थापना मार्च 2020 में कोविड-19 महामारी जैसी आपात परिस्थितियों से निपटने के उद्देश्य से की गई थी। फंड के उपयोग, पारदर्शिता और धनराशि के इस्तेमाल को लेकर समय-समय पर सार्वजनिक बहस होती रही है। ऐसे में दीपके की मांग ने एक बार फिर इस सवाल को चर्चा में ला दिया है कि उपलब्ध संसाधनों का उपयोग देश के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों के लिए किस तरह अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।

शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, किसी स्कूल के निर्माण अथवा आधुनिकीकरण की लागत उसके स्थान, भवन के आकार, विद्यार्थियों की संख्या और उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं पर निर्भर करती है। इसलिए किसी निश्चित संख्या में स्कूलों के निर्माण का अनुमान लगाने से पहले विस्तृत परियोजना लागत और स्थानीय परिस्थितियों का आकलन आवश्यक है।

अभिजीत दीपके की मांग के बाद पीएम केयर्स फंड की राशि के संभावित उपयोग और ग्रामीण सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने को लेकर बहस तेज होने की संभावना है। अब देखना होगा कि इस मांग पर केंद्र सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आती है या नहीं।

What do you feel about this post?

0%
like

Like

0%
love

Love

0%
happy

Happy

0%
haha

Haha

0%
sad

Sad

0%
angry

Angry

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *