ब्यूरो रिपोर्ट नई दिल्ली|Dilli Times Media
नई दिल्ली, 13 अगस्त 2026: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बुधवार को रचनात्मक कांग्रेस नेशनल कन्वेंशन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि विदेश नीति नेताओं से गले लगने या व्यक्तिगत दोस्ती का नाम नहीं है, बल्कि यह देश के हितों की रक्षा का माध्यम है।
राहुल गांधी ने मंच से कहा, “पता नहीं किसने इनके दिमाग में डाल दिया कि विदेश नीति का मतलब नेताओं से गले लगना है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी विदेशी नेता से दोस्ती करना या गले लगना विदेश नीति नहीं हो सकता। “भारत के प्रधानमंत्री किसी से दोस्ती नहीं करते, बल्कि वह देश के हित के लिए काम करते है,”
उन्होंने स्पष्ट किया।
कांग्रेस नेता ने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि भारत के पास ईरान, अमेरिका और रूस जैसे पुराने संबंधों का लाभ उठाकर मध्यस्थता करने का अवसर था। उनके अनुसार, यदि नेतृत्व ने इस अवसर को पहचाना होता तो भारत क्षेत्रीय कूटनीति में सक्रिय भूमिका निभा सकता था। इसके बजाय पाकिस्तान ने मध्यस्थता का स्थान ले लिया, जबकि भारत केवल देखने तक सीमित रह गया।
राहुल गांधी ने इस मौके पर सरकार की विदेश नीति को कमजोर बताते हुए कहा कि देश की सामरिक स्वायत्तता और वैश्विक प्रभाव को मजबूत करने के बजाय व्यक्तिगत रिश्तों पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। उन्होंने कांग्रेस की परंपरा का जिक्र करते हुए याद दिलाया कि विदेश नीति हमेशा राष्ट्रीय हितों पर आधारित होनी चाहिए, न कि व्यक्तिगत प्रदर्शन पर।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्ष लगातार सरकार की विदेश नीति को लेकर सवाल उठा रहा है। कांग्रेस का कहना है कि मौजूदा कूटनीति में रणनीतिक स्पष्टता की कमी है और देश के दीर्घकालिक हितों को नजरअंदाज किया जा रहा है।
सरकार की ओर से अभी तक इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। भाजपा आमतौर पर ऐसे आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी करार देती रही है और मोदी सरकार की विदेश नीति को स्वतंत्र तथा राष्ट्रीय हितों के अनुरूप बताती है।
रचनात्मक कांग्रेस कन्वेंशन में राहुल गांधी ने पार्टी की रणनीति और संगठनात्मक मुद्दों पर भी चर्चा की। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा का विषय बना हुआ है।
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