चमोली में बादल फटने से तबाही: 40 मीटर लंबा वैली ब्रिज कागज की तरह बह गया, बीआरओ कर्मी लापता; नीती घाटी के दर्जनों गांव कटे

उत्तराखंड राष्ट्रीय

ब्यूरो रिपोर्ट नई दिल्ली|Dilli Times Media

देहरादून/चमोली, 11 अगस्त 2026: उत्तराखंड के चमोली जिले की नीति घाटी में सोमवार शाम भारी बारिश और बादल फटने की घटना के बाद तमक नाले में अचानक आए भयानक जलसैलाब ने तबाही मचा दी। पहाड़ों से मलबा और पानी का तेज बहाव इतना शक्तिशाली था कि ज्योतिर्मठ-मलारी मोटर मार्ग पर बना 40 मीटर लंबा वैली (बेली) ब्रिज कुछ ही क्षणों में कागज की तरह बह गया। इस घटना में सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) का एक कर्मी लापता हो गया है, जबकि कई सीमांत गांवों का संपर्क पूरी तरह कट गया है।
घटना सोमवार को करीब शाम 5:30 से 5:45 बजे के बीच हुई। तमक नाले में अचानक जलस्तर बढ़ने और मलबे के साथ आए सैलाब ने 123 बीआरटीएफ, सुराईथोटा द्वारा हाल ही में निर्मित बेली ब्रिज को पूरी तरह उखाड़ फेंका। पुल के पास खड़े वाहन भी तेज धारा की चपेट में आ गए। बीआरओ चालक पंकज कुमार (पिथौरागढ़ निवासी, नैक रैंक) पानी का जायजा ले रहे थे, तभी पुल ढह गया और वे बहाव में समा गए। उनकी तलाश अभी जारी है।
संपर्क टूटा, सीमा क्षेत्र प्रभावित
पुल बहने से नीती घाटी के जुम्मा, नीती, मलारी, जेलम, बाम्पा, गमशाली समेत 12 से 16 सीमांत गांवों और आईटीबीपी की अग्रिम चौकियों का जिला मुख्यालय से सड़क संपर्क पूरी तरह कट गया है। मलारी से आगे वाहनों की आवाजाही बंद कर दी गई है। स्थानीय प्रशासन के अनुसार, घरों और खेतों को भी नुकसान पहुंचा है।
प्रशासन और राहत अभियान
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घटना का तत्काल संज्ञान लिया और आपदा प्रबंधन सचिव को निर्देश दिए कि राहत-बचाव कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंद किशोर जोशी और अन्य अधिकारियों ने बताया कि एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीमें मौके पर तैनात हैं। लापता कर्मी की तलाश युद्धस्तर पर जारी है। निचले इलाकों में अलर्ट जारी किया गया है।
उत्तरकाशी में भी संकट
वहीं, भारी बारिश के कारण उत्तरकाशी जिले में भी गंगोत्री और यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग कई स्थानों पर भूस्खलन और मलबा आने से बाधित रहे हैं। बीआरओ और संबंधित विभाग मार्ग खोलने के प्रयास में जुटे हुए हैं। मानसून की सक्रियता के बीच चारधाम यात्रा मार्गों पर यात्रियों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
यह घटना एक बार फिर उत्तराखंड के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र और मानसून के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में आने वाली आपदाओं की याद दिलाती है। प्रशासन स्थिति पर लगातार निगरानी रखे हुए है। आगे की जानकारी उपलब्ध होते ही अपडेट जारी किए जाएंगे।

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