ब्यूरो रिपोर्ट नई दिल्ली|DTM
नई दिल्ली, 16 अक्टूबर 2026: शारदीय नवरात्रि के छठे दिन शुक्रवार को देशभर में मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। मंदिरों और पूजा पंडालों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ रही। भक्तों ने मां के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की। जगह-जगह भजन-कीर्तन, आरती और हवन के आयोजन किए गए।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कात्यायनी नवदुर्गा का छठा स्वरूप हैं। कहा जाता है कि महर्षि कात्यायन की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर मां दुर्गा ने उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लिया था। इसी कारण उनका नाम कात्यायनी पड़ा। देवी को महिषासुर का वध करने वाली शक्ति के रूप में भी पूजा जाता है। सिंह पर सवार मां कात्यायनी साहस, शक्ति और अन्याय पर विजय का प्रतीक मानी जाती हैं।
शहद का भोग लगाकर की सुख-समृद्धि की कामना
नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी को शहद का भोग अर्पित करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी की आराधना से भय दूर होता है और जीवन की बाधाओं का सामना करने की शक्ति मिलती है। विशेष रूप से अविवाहित युवतियां मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए मां से प्रार्थना करती हैं।
दिल्ली सहित देश के विभिन्न शहरों में श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर मां का आशीर्वाद मांगा। मंदिरों में विशेष आरती और धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से नवरात्रि का उत्साह देखने को मिला।
नवरात्रि के छठे दिन का संबंध हरे रंग से भी जोड़ा जाता है, जिसे प्रकृति, समृद्धि और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। भक्तों ने श्रद्धा और भक्ति के साथ मां कात्यायनी की पूजा कर सुख, शांति और मंगलमय जीवन की कामना की। नवरात्रि के आगामी दिनों में भी देवी दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की आराधना का सिलसिला जारी रहेगा।
जय माता दी!
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