ब्यूरो रिपोर्ट नई दिल्ली|DTM
ठेका ड्राइवर-कंडक्टरों की हड़ताल चौथे दिन भी जारी; सड़कों पर बसें कम, मेट्रो-ऑटो पर बढ़ा दबाव, सरकार और यूनियन के बीच वेतन पर पेच
शुक्रवार 18 सितंबर 2026 नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में डीटीसी के ठेका ड्राइवरों और कंडक्टरों की हड़ताल ने शुक्रवार को चौथे दिन भी यात्रियों की मुश्किलें बढ़ाए रखीं। 15 सितंबर से जारी हड़ताल के चलते बड़ी संख्या में बसें डिपो में खड़ी हैं और कई रूटों पर सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था प्रभावित हुई है। रोजाना बसों से सफर करने वाले लाखों यात्रियों को ऑटो, मेट्रो और ऐप आधारित कैब का सहारा लेना पड़ रहा है।
यूनियन का दावा है कि करीब 10 हजार से 12 हजार चालक हड़ताल में शामिल हैं और 80 से 90 प्रतिशत बसें विभिन्न डिपो में खड़ी हैं। डीटीसी के बेड़े में करीब 6,840 बसें हैं, जिनसे रोजाना लगभग 40 लाख यात्री सफर करते हैं। इसका सबसे ज्यादा असर छात्रों, निम्न आय वर्ग के यात्रियों, घरेलू सहायिकाओं और अस्पताल जाने वाले मरीजों पर पड़ रहा है।
₹20 का सफर 100–150 रुपये तक
बसों की कमी के बीच कई यात्रियों ने ऑटो और ऐप कैब का किराया बढ़ने की शिकायत की। बदरपुर-मूलचंद जैसे रूटों पर करीब 20 रुपये का सामान्य बस सफर वैकल्पिक साधनों से 100 से 150 रुपये तक पहुंचने की बात सामने आई। कई प्रमुख बस स्टॉप पर यात्रियों की भीड़ भी देखी गई।
वेतन वृद्धि पर अटका समाधान
यूनियन की प्रमुख मांगों में दैनिक मजदूरी बढ़ाकर 2,000 रुपये करना, छुट्टियों का भुगतान, बोनस, चिकित्सा सुविधा, ओवरटाइम, साप्ताहिक अवकाश और ठेका व्यवस्था के बजाय सीधे डीटीसी में समायोजन शामिल है।
परिवहन मंत्री पंकज कुमार सिंह के अनुसार सरकार ने अधिकांश मांगों पर सहमति बना ली है, जबकि वेतन वृद्धि का मुद्दा अभी लंबित है। उन्होंने चालकों से हड़ताल समाप्त कर काम पर लौटने की अपील की है।
मेट्रो पर बढ़ा दबाव
हड़ताल के बाद मेट्रो यात्रियों की संख्या भी बढ़ी। बुधवार को यात्रियों की संख्या 80.71 लाख तक पहुंच गई। दबाव को देखते हुए डीएमआरसी ने अतिरिक्त ट्रेनें और अतिरिक्त फेरे चलाए।
अब निगाहें सरकार और यूनियन के बीच होने वाली अगली बातचीत पर हैं। यूनियन लिखित आदेश की मांग पर कायम है, जबकि सरकार बातचीत के जरिए समाधान की बात कह रही है।
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