एक लाख सरकारी नौकरियों की घोषणा पर बसपा सुप्रीमो मायावती का तंज, बोलीं- ‘चुनावी कदम’ से ज्यादा कुछ नहीं, पारदर्शी भर्ती की मांग

उत्तर प्रदेश राजनीति

ब्यूरो रिपोर्ट नई दिल्ली| DTM

लखनऊ/नई दिल्ली, 27 अगस्त 2026: उत्तर प्रदेश में अगले छह महीनों में एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देने की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की घोषणा को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने सरकार के फैसले का स्वागत तो किया, लेकिन इसकी टाइमिंग पर सवाल उठाते हुए इसे ‘चुनावी कदम’ करार दिया।

मायावती ने बुधवार को अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर जारी बयान में कहा कि विधानसभा चुनाव से ठीक पहले छह महीने में एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देने की घोषणा देर से उठाया गया सही कदम है, लेकिन इसकी समयसीमा को देखते हुए यह अधिकतर चुनावी कदम प्रतीत होता है। उन्होंने कहा कि यदि नियुक्तियां पेपर लीक, भ्रष्टाचार और अन्य अनियमितताओं से मुक्त होकर तय समय में पूरी होती हैं, तभी इसका वास्तविक लाभ युवाओं को मिल सकेगा।

पेपर लीक और भ्रष्टाचार से मुक्त भर्ती पर जोर

बसपा प्रमुख ने कहा कि सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता बेहद जरूरी है। उन्होंने सरकार से यह सुनिश्चित करने की मांग की कि प्रस्तावित नियुक्तियां किसी भी तरह के पेपर लीक, भ्रष्टाचार अथवा अनियमितता की चपेट में न आएं।

मायावती के मुताबिक, यदि भर्ती प्रक्रिया समय पर और पूरी पारदर्शिता के साथ पूरी नहीं होती है तो सरकार की यह घोषणा युवाओं के लिए महज एक चुनावी वादा बनकर रह सकती है।

बैकलॉग भर्ती को लेकर भी उठाया सवाल

मायावती ने अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के आरक्षित पदों के बैकलॉग को भरने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि इन वर्गों के लंबे समय से खाली पड़े आरक्षित पदों पर भर्ती को लेकर भी सरकार को स्पष्ट और प्रभावी कदम उठाने चाहिए।

6,800 शिक्षक अभ्यर्थियों का मुद्दा उठाया

बसपा प्रमुख ने 69,000 शिक्षक भर्ती से जुड़े विवाद का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आरक्षण नियमों को लेकर विवाद के बीच SC, ST और OBC वर्ग के करीब 6,800 अभ्यर्थी लंबे समय से अपनी नियुक्ति की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।

मायावती ने सरकार से इन अभ्यर्थियों के मामले पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने और उन्हें वास्तविक राहत देने की अपील की।

बंद सरकारी स्कूलों को दोबारा सक्रिय करने की मांग

स्कूली शिक्षा की स्थिति को लेकर भी मायावती ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बसपा उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने की मांग लगातार करती रही है।

उन्होंने प्रदेश में बंद किए गए करीब 30 हजार सरकारी स्कूलों को बेहतर व्यवस्था के साथ दोबारा सक्रिय करने की मांग की। उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत किए बिना युवाओं के भविष्य और रोजगार की समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है।

महिलाओं की सुरक्षा और आत्मनिर्भरता पर जोर

महिलाओं से जुड़े मुद्दे पर मायावती ने कहा कि बुजुर्ग महिलाओं को बसों में मुफ्त यात्रा जैसी सुविधाओं से अधिक जरूरी यह सुनिश्चित करना है कि महिलाओं को हर क्षेत्र में शोषण, अत्याचार और उत्पीड़न से सुरक्षा मिले।

उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता देने की जरूरत बताई।

योगी ने की थी एक लाख नौकरियों की घोषणा

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 25 अगस्त को एक कार्यक्रम के दौरान घोषणा की थी कि उत्तर प्रदेश में अगले छह महीनों में एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र दिए जाएंगे। सरकार की ओर से यह भी दावा किया गया है कि पिछले नौ वर्षों में 9.30 लाख से अधिक युवाओं को पारदर्शी प्रक्रिया के तहत सरकारी नौकरियां दी गई हैं।

अब मायावती के बयान ने इस घोषणा की टाइमिंग और भर्ती प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। विधानसभा चुनाव से पहले रोजगार का मुद्दा उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक अहम विषय बनता दिखाई दे रहा है।

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